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कर्नाटक के आठ पुलिसकर्मी को किया गया निलंबित, पढ़िये पूरी संबंधित खबर

यह खबर कर्नाटक के कोडागु जिले का है। जहाँ आठ पुलिसकर्मी पर आरोप लगाया जा रहा है कि लॉकडाउन मानदंडों का उल्लंघन करने के लिए “मानसिक रूप से एक 50 वर्षीय विकलांग व्यक्ति की पीट-पीटकर हत्या” कर दी गई है। जिसके बाद से उन आठों पुलिसकर्मी को आज यानी रविवार को निलंबित कर दिया गया। मामले के संबंध में शिकायत दर्ज होने के बाद एक वरिष्ठ पुलिस अधिकारी द्वारा प्रस्तुत रिपोर्ट के बाद निलंबन आदेश जारी किया गया था।

कर्नाटक दक्षिणी रेंज के पुलिस महानिरीक्षक (IGP) प्रवीण मधुकर पवार ने बताया कि यह घटना 9 जून की देर रात विराजपेट टाउन पुलिस स्टेशन के पास की है। द इंडियन एक्सप्रेस की खबरों के मुताबिक, “आठ पुलिसकर्मियों को निलंबित करने का निर्णय प्रारंभिक रिपोर्ट के आधार पर लिया गया था। इससे मामले की निष्पक्ष जांच सुनिश्चित करने में मदद मिलेगी।”

पुलिस ने उन आठ निलंबित अधिकारियों की पहचान हेड कांस्टेबल एमयू सुनील और पुलिस कांस्टेबल एनएस लोकेश, एचजे तनुकुमार, एनएच सतीश, सुनील एमएल, रमेश ए, केजी नेहरू और बीटी प्रदीप के रूप में की है। ये सभी पुलिसकर्मी विराजपेट में तैनात थे।

विराजपेट के पुलिस उपाधीक्षक (DSP) ने इस घटना में कथित रूप से शामिल पुलिसकर्मियों के खिलाफ रिपोर्ट सौंपी थी। आईजीपी पवार ने बताया कि उन्होंने मृतक के भाई की शिकायत के आधार पर डीएसपी से रिपोर्ट मांगी थी।

एक अन्य पुलिस अधिकारी ने इस मामले के बारे में बताया कि शिकायत में उल्लेख किया गया था कि मृतक की पहचान रॉय डिसूजा (50) के रूप में की गई थी। जिसे लॉकडाउन मानदंडों को लागू करने के लिए बाहर गए पुलिस अधिकारियों द्वारा कथित तौर पर पीटे जाने के बाद “अनिश्चित स्थिति” में एक अस्पताल में भर्ती कराया गया था। वारदात 9 जून को थाने के बाहर पेट्रोल पंप के पास हुई।

पुलिसकर्मियों के खिलाफ दर्ज शिकायत में साफतौर पर बताया गया है कि घटना के बाद डिसूजा को पुलिस स्टेशन ले जाया गया, जहां उनके साथ कथित तौर पर मारपीट की गई। मृतक के भाई ने शिकायत में उल्लेख किया, “पुलिस स्टेशन में हमले के बाद, डिसूजा जमीन पर गिर गया था, जिसके बाद उसकी मां को बुलाया गया और अपने बेटे को ले जाने के लिए सूचित किया गया। परिवार ने तब डिसूजा को इलाज के लिए पास के एक निजी अस्पताल में भर्ती कराने का फैसला किया, जहां उन्होंने 12 जून को अंतिम सांस ली।”

मामला अब कर्नाटक अपराध जांच विभाग (सीआईडी) को स्थानांतरित कर दिया गया है।

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