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केंद्रीय मंत्री की जुबानी:- अब वैक्सीन उपलब्ध नहीं तो क्या हम फांसी लगा लें

केंद्रीय रसायन और उर्वरक मंत्री सदानंद गौड़ा ने बीते दिन गुरुवार को बोले कि सरकार के निर्दशों के मुताबिक वैक्सीन का उत्पादन नहीं होने पर क्या सरकार में शामिल लोगों को फांसी लगा लेनी चाहिए? पत्रकारों से बात करते हुए मंत्री गौड़ा ने बोला, अदालत ने अच्छे इरादे से कहा कि देश में हर किसी का टीकाकरण होना चाहिए। मैं आपसे पूछना चाहता हूं कि कल यदि अदालत कहती है कि आपको टीका देना होगा और यदि इसका उत्पादन नहीं हो पाता है तो क्या हमें फांसी लगा लेनी चाहिए?

वैक्सीन की कमी पर सवालों का जवाब देते हुए केंद्रीय मंत्री ने सरकार की कार्य योजना पर जोर दिया। उन्होंने बोला कि फैसले किसी तरह का राजनीतिक बढ़त हासिल करने या अन्य उद्देश्य से नहीं लिए जाते हैं। उन्होंने बोला कि सरकार अपना काम ईमानदारी से और गंभीरता पूर्वक कर रही है, जिसमें कुछ कमियां भी सामने आई हैं। उन्होंने पूछा, व्यावहारिक रूप से कुछ चीजें हमारे नियंत्रण के बाहर हैं। क्या हम उनका प्रबंधन कर सकते हैं? हालांकि, उन्होंने स्पष्ट किया कि सरकार यह सुनिश्चित करने के लिए अपनी ओर से पूरा प्रयास कर रही है कि एक-दो दिनों में टीकाकरण की स्थिति में सुधार लाई जा सके।

दावा किया गया है इस साल के अंत तक भारत में 18 साल से अधिक उम्र के सभी लोगों को वैक्सीन की दोनों डोज लगाई जा सकती हैं। सरकार ने दिसंबर तक देश में वैक्सीन की उपलब्धता का पूरा रोडमैप पेश किया है। इसके मुताबिक जुलाई तक देश में कुल 51.6 करोड़ डोज उपलब्ध होंगी। ध्यान रहे कि इनमें से लगभग 17 करोड़ डोज दी जा चुकी हैं। वहीं, अगस्त से दिसंबर तक 216 करोड़ डोज का उत्पादन होगा। जाहिर सी बात है देश में 18 साल से अधिक उम्र के लगभग 95 करोड़ लोगों को दोनों डोज की वैक्सीन से कहीं अधिक होंगी।

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