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देश के महान धावक व ‘फ्लाइंग सिख’ मिल्खा सिंह का हुआ निधन

भारत के महान धावक व ‘फ्लाइंग सिख’ मिल्खा सिंह का शुक्रवार की देर रात 91 वर्ष की उम्र में निधन हो गया। ऐसा सूत्रों के मुताबिक बताया जा रहा कि वह कोरोना संक्रमण से पीड़ित थे। उनके निधन की खबर मिलते ही इस वक़्त पूरे देश में शोक के लहर का माहौल बना हुआ है। मिल्खा सिंह संक्रमित पाए जाने के बाद से उनको अस्पताल में भर्ती करा दिया गया था। पिछले कुछ दिनों में उनकी तबीयत में काफी सुधार भी हुई थी लेकिन अचानक से ऑक्सीजन का स्तर कम हो जाने के बाद से उनको सांस लेने में काफी तकलीफ हुई और देर रात तक इस महान हस्ति के निधन की खबर सुनने को आई।

मिल्खा सिंह के साथ उनकी पत्नी निर्मल कौर भी कोरोना संक्रमित हो गईं थीं। हालत गंभीर हो जाने पर उन्हें मोहाली के निजी अस्पताल में दाखिल कराया गया था। जहाँ उनका ईलाज चल रहा था। उनकी भी हालत कई दिनों तक स्थिर बनी हुई थी। निर्मल भारतीय महिला वॉलीबॉल टीम की कप्तान रह चुकी थीं। साथ ही वे पंजाब सरकार में स्पोर्ट्स डायरेक्टर (महिलाओं के लिए) के पद पर भी रही थीं। मिल्खा सिंह के परिवार की ओर से जारी एक बयान में बताया गया था कि निर्मल कौर का निधन 13 जून की शाम 4.00 बजे हुआ। निर्मल 85 वर्ष की थी। बयान में आगे बताया गया था कि ICU में भर्ती होने की वज़ह से मिल्खा सिंह अपनी पत्नी निर्मल कौर के अंतिम संस्कार में शामिल नहीं हो सके थे।

पीटीआइ की खबरों के मुताबिक शुक्रवार की देर रात 11 बजकर 30 मिनट पर मिल्खा सिंह ने आखिरी सांस ली। 91 वर्ष के मिल्खा सिंह कोरोना संक्रमित पाए गए थे। भारत के इस महान धावक को दुनियाभर में फ्लाइंग सिख के नाम से जाना जाता है। भारत के लिए कॉमनवेल्थ में सबसे पहला गोल्ड मेडल जीतने का कमाल मिल्खा सिंह जी ने ही किया था। इसके अलावा एशियन गेम्स में इस महान धावक के नाम चार गोल्ड मेडल भी थे। ओलंपिक में भारत की तरफ से कांस्य पदक जीतने से चूके मिल्खा को भारत के सबसे महान और चमकदार एथलीट के तौर पर जाना जाता है।

भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कुछ ही दिन पहले मिल्खा सिंह के बेहतर स्वास्थ की कामना की थी। उन्होंने कहा था कि ओलंपिक जाने वाली टीम के आपके आशीर्वाद की जरूरत है। शुक्रवार देर रात पीएम ने इस महान हस्ति के निधन की खबर पर शोक जताया और परिवार को इस मुश्किल वक्त में हिम्मत बनाए रखने की बात कही।

चार बार के एशियाई खेलों के स्वर्ण पदक विजेता मिल्खा ने 1958 राष्ट्रमंडल खेलों में भी पीला तमगा हासिल किया था। उनका सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन हालांकि 1960 के रोम ओलंपिक में था जिसमें वह 400 मीटर फाइनल में चौथे स्थान पर रहे थे। उन्होंने 1956 और 1964 ओलंपिक में भी भारत की नुमाइंदगी की. उन्हें 1959 में पद्मश्री से नवाजा गया था।

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