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नाइट्रोजन आर्गन टैंकरों को ऑक्सीजन टैंकरों में बदलने की पूरी तैयारी, सरकार का बड़ा फैसला

ऑक्सीजन की ढुलाई में तेजी लाने के लिए उद्योग विभाग ने देश में उपलब्ध नाइट्रोजन और आर्गन के 1,199 टैंकरों में से 443 टैंकरों को तत्काल तरल मेडिकल ऑक्सीजन (एलएमओ) की ढुलाई लायक बनाने का काम शुरू कर दिया है। यह काम युद्धस्तर पर शुरू हो चुका है जिसकी निगरानी संयुक्त सचिव स्तर के कई बड़े अधिकारी कर रहे हैं। नाइट्रोजन और आर्गन टैंकर रखने वाली कंपनियों को अपने-अपने टैंकरों को एलएमओ की ढुलाई लायक बदलने के लिए बोल दिया गया है।

सिर्फ यही नहीं सरकार ने यह भी फैसला किया है कि रोजाना के आधार पर इन कार्यों की समीक्षा की जाएगी। वहीं, आक्सीजन की ढुलाई करने वाले सभी वाहनों में लोकेशन ट्रैकिंग मशीनें भी लगाई जाएंगी ताकि किसी प्रकार की गड़बड़ी न हो सके। हाल ही में आक्सीजन से लदे वाहनों के गायब होने की भी काफी खबरें सामने आई थी।

अगले हफ्ते से कई नाइट्रोजन टैंकर ऑक्सीजन ढुलाई के लिए तैयार हो जाएंगे। टैंकरों की कमी की वजह से तरल ऑक्सीजन देश में उपलब्ध होने के बावजूद उसकी ढुलाई नहीं हो पा रही है जिसके चलते कई अस्पतालों में आक्सीजन की काफी किल्लत हो गई है। यही नहीं सरकार दूसरे मुल्‍कों से भी टैंकर मंगा रही है।

उद्योग विभागों के मुताबिक, देश में 434 आर्गन टैंकर हैं तो 765 नाइट्रोजन टैंकर हैं। इन 1,199 टैंकरों में से 74 फीसद यानी 886 टैंकर छह राज्यों गुजरात, हरियाणा, महाराष्ट्र, झारखंड, उत्तर प्रदेश और तमिलनाडु में उपलब्ध हैं। इन टैंकर रखने वाली कंपनियों को बाद में और टैंकरों को ऑक्सीजन ढुलाई के लायक बनाने के लिए कहा जा सकता है। इन कंपनियों में आइनाक्स, लिंडे, प्राक्स एयर, एयर वाटर एंड एयर लिक्विड, विशाखा इंडस्ट्रियल और श्रीराम आक्सीजन जैसी कंपनियां शामिल हैं।

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