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यूपी में गंगा में तैर रहे शवों को लेकर प्रियंका गांधी ने की न्यायिक जांच की माँग

कोरोना संक्रमण को लेकर कांग्रेस नेता लगातार केंद्र और यूपी सरकार पर हमलावर हैं। कांग्रेस नेता व महासचिव प्रियंका गांधी वाड्रा ने यूपी में गंगा नदी में तैर रहे शवों की न्यायिक जांच की मांग की है। बिहार के बक्सर जिले के चौसा में महादेवा घाट और श्मशान घाट के बीच गंगा तट पर 71 शव बहते हुए मिले थे। जिसे लोगों ने बखूबी देखा। मंगलवार को इन सभी शवों का पोस्टमार्टम करने के बाद दफना दिया गया था। फिर शवों की पहचान को डीएनए जांच के लिए नमूने सुरक्षित रख लिए गए थे। हालांकि, शवों के गलने की वज़ह से कोरोना संक्रमण का पता नहीं लग सका था। फिर भी बुधवार को जिला प्रशासन द्वारा गंगा नदी में लगाए गए जाल में उत्तर प्रदेश की तरफ से बहकर आए कुल पांच शव फंसे हुए मिले। इनमें से दो शव मंगलवार को जाल में फंसे थे। इससे पहले सोमवार को यूपी के हमीरपुर में यमुना नदी में सात शव उतराते हुए पाए गये थे। इसके अलावा यूपी के गाजीपुर और बलिया में गंगा नदी में तैरते हुए शव मिले थे।

उन्नाव जिले में गंगा के लगभग सभी तटों पर रेती में दफन शवों का अंबार लगा हुआ है। बक्सर हो या रौतापुर, परियर हो या बंदीमाता माता घाट हर जगह जिधर नजर डालिए, उधर रेत में शव दफनाकर समाधि बनी हुई दिखाई पड़ती है। जगह-जगह कफन बिखरे पड़े हैं। ये हालात कोरोना महामारी की भयावहता को बयां करने के लिए काफी हैं। वहीं, पहले से अंतिम संस्कार के लिए तय घाटों पर भी चिताएं ही चिताएं लगी हुई हैं। खास बात तो ये है कि शवों को दफनाने में की गई जल्दबाजी से मानवीय संवेदनाएं तार-तार की जा रहीं हैं।

तीन-चार फीट गहरे गड्ढों में दफनाए गये शवों के आसपास आवारा कुत्ते टहल रहें हैं और शवों को नोच रहे हैं। जिले में वैसे तो घोषित रूप से गंगाघाट शुक्लागंज, बक्सर, जाजमऊ, नानामऊ व परियर घाटों में अंतिम संस्कार किए जाते हैं। इसमें शुक्लागंज का पक्का घाट ही ठीक ढंग से बना है। बाकी सारे घाट कच्चे हैं। कोरोना संक्रमण के बीच इन घाटों के साथ ही रौतापुर में तो 500 शव दफन होने की बात सामने आई है। कच्चे घाटों पर लगातार शव दफनाए जा रहे हैं। कोरोना से मौतों का बढ़ता हुआ ग्राफ यहां के हालात की गवाही दे रहे हैं।

आइआइटी कानपुर में पर्यावरण विभाग के प्रो. विनोद तारे ने बोला कि जब देश कोरोना महामारी से जूझ रहा है, तब गंगा और उसकी सहायक नदियों में शवों का मिलना बेहद गंभीर बात है। उन्होंने बोला, वैसे तो कोरोना वायरस के पानी में मिलने को लेकर फिलहाल अभी तक कोई शोध सामने नहीं आई है, फिर भी इन शवों को लेकर सभी तरह के एहतियात पूरी तरह से बरते जाने चाहिए।

ये शव कहां से आए, इसकी भी जानकारी करें। उन्होंने बोला कि पिछले कई सालों से गंगा में शव प्रवाहित होकर सामने आते रहे। जब सरकार ने प्रदूषण रोकने संबंधी सख्त कदम उठाए तो स्थिति काफी हद तक सुधरी भी थी। उन्होंने बोला, शव प्रवाहित होंगे तो इससे पानी जरूर दूषित होगा। आसपास रहने वालों की सेहत को भी बेहद खतरा हो सकता है।

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