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लक्षद्वीप के सीजेएम से केरल उच्च न्यायालय ने गिरफ्तार हुए विरोधकर्ताओं को रिहा करने को बोला

बीते दिन व तारीख मंगलवार यानी 1 जून को केरल उच्च न्यायालय ने लक्षद्वीप के मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट से प्रशासन द्वारा लागू की गई प्रशासनिक नीतियों का विरोध करने वाले लोग जो गिरफ्तार किए गए हैं। उन लोगों को रिहा करने को न्यायालय ने बोला। केंद्र शासित प्रदेश के द्वीपों में इन नीतियों के कारण हाल ही में कई विरोध प्रदर्शन हुए हैं।

अदालत इस मुद्दे पर लक्षद्वीप निवासी द्वारा दायर एक रिट याचिका पर सुनवाई कर रही थी।

“हमारे लिए सबसे महत्वपूर्ण चिंता उन लोगों की स्वतंत्रता है जो हिरासत में हैं। उन्हें न्याय तक पहुंच के साधनों से वंचित नहीं किया जाएगा। ऐसी परिस्थिति में सीजेएम, अमिनी को निर्देश देना उचित है कि किलथन द्वीप के एसएचओ द्वारा दर्ज़ किए गए मामले के बाद हिरासत में लिए गए व्यक्तियों का मामला आज दोपहर 3 बजे तक उठाया जाए। सीजेएम ऐसे लोगों की रिहाई का आदेश दे सकता है। स्व बांड के निष्पादन पर या उन शर्तों पर जिन्हें वह लागू करना उचित समझता है, “जस्टिस ए मोहम्मद मुस्ताक और कौसर एडप्पागथ की खंडपीठ ने बोला।

बंदियों की ओर से पेश वकीलों के मुताबिक बताया गया की व्यक्तिगत रूप से और सोशल मीडिया पर विरोध कर रहे लोगों को पुलिस ने उठाया। उन्होंने यह भी बताया कि 29 मई तक 23 लोगों को हिरासत में लिया गया है।

प्रदर्शनकारियों के खिलाफ संलिप्त धारा- धारा 285 (आग या ज्वलनशील पदार्थ के संबंध में लापरवाह आचरण), 500 (मानहानि की सजा), 120 बी (आपराधिक साजिश), और 143 (गैरकानूनी सभा) r/w 149 (सामान्य इरादे से गैरकानूनी सभा) के तहत प्राथमिकी दर्ज की गई थी)। भारतीय दंड संहिता (आईपीसी) और 51 (बी) आपदा प्रबंधन अधिनियम, 2005 की, बार और बेंच ने बताया।

लक्षद्वीप प्रशासक का प्रतिनिधित्व करने वाले वकील ने बताया कि कुछ लोगों द्वारा जिला कलेक्टर का पुतला फूंकने और भूख हड़ताल पर जाने के बाद लोगों को गिरफ्तार किया गया था।उन्होंने यह भी दावा किया कि किलथन के थाना प्रभारी और कार्यकारी मजिस्ट्रेट ने बंदियों को जमानत पर रिहा करने की पेशकश की थी लेकिन उन्होंने इनकार कर दिया था। बंदियों के वकीलों में से एक ने इस दावे से असहमति जताते हुए कहा कि ऐसा कोई प्रावधान नहीं किया गया था।

अदालत ने किलथन चिकित्सा अधिकारी को सभी बंदियों की जांच करने के लिए भी बोला, यह कहते हुए कि जो कोई भी COVID-19 सकारात्मक हो सकता है उसे मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट के सामने पेश नहीं किया जाना चाहिए। अमिनी के मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट को उच्च न्यायालय ने बुधवार को दोपहर 3 बजे मामले को उठाने के लिए बोला है, लेकिन अदालत ने निर्दिष्ट किया कि बंदियों की भौतिक उपस्थिति की आवश्यकता नहीं थी।

मामले की बुधवार यानी आज फिर इस मामले की सुनवाई होगी।

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